by admin on | Nov 25, 2024 04:41 PM
जिम्मेदारों की मनमर्जी; धूल फांक रहे अम्बिकापुर शहर के लोग....धूल के गुब्बार बड़े-बड़े गड्ढों के बीच सड़क से निकलना मुश्किल...!
प्रतिदिन निकलते हैं लाखों लोगों के बीच हजारों वाहन... क्या बड़ी दुर्घटना के साथ संवेदना व्यक्त करने के इंतजार में हैं जनप्रतिनिधि!
जर्जर हुई अम्बिकापुर शहर की सड़कें :राष्ट्रीय राजमार्ग पर चलना मुश्किल,उड़ रही धूल व गड्ढों से लोग हो रहे परेशान...!
मुख्य सड़क पर उड़ते धूल के गुबार, लोगों को कर रहे बीमार... जिम्मेदारों को किसका है इंतजार..!
श्वांस व एलर्जी के रोगियों को हो रही परेशानी, घाव में इंफेक्शन होने का बना खतरा..!
"आदित्य गुप्ता"
अंबिकापुर -: शहर के प्रमुख मार्ग पर गड्ढों से राहत देने के लिए सड़क निर्माण भले ही किया जा रहा हो, लेकिन गिट्टी के ऊपर डामरीकरण न होने से वाहनों की आवाजाही से उड़ रही धूल में चलना मुश्किल हो रहा है। इससे लोग बीमार हो रहे हैं। चालकों को धूल से दिखाई न देने पर दुर्घटनाएं होने का खतरा भी बना हुआ है। इसके बाद भी जिम्मेदार अनदेखा कर रहे हैं।शहर की प्रमुख सड़क खस्ता हो चुकी थी, बरसात के मौसम में गड्ढे हो चुके हैं। चार पहिया वाहन तो दूर दो पहिया वाहन का चलना भी मुश्किल हो गया था। पेच व गिट्टी डालकर ऊंचा कर इतिश्री कर ली है। अब सड़क की उड़ती धूल से स्थानीय लोगों का जीना दूभर हो गया है। श्वांस व एलर्जी के रोगियों को परेशानी हो रही है। घाव में इंफेक्शन होने का खतरा बना रहता है।
अंबिकापुर से गुजरी राष्ट्रीय राजमार्ग की सडक बदहाल है। अंबिकापुर-मनेन्द्रगढ़ रोड व अंबिकापुर-बलरामपुर मार्ग की सबसे ज्यादा स्थिति खराब है। इस मार्ग पर चलना खतरों से खली नहीं है। सडक पर बने दर्जनों गढ़ों के साथ-साथ धूल से लोगों का सेहत खराब हो रहा है। गड्ढों में हिचकोले खाने से लोग कमर दर्द व धूल से सांस जैसी बीमारी से लोग पीडि़त हो रहे हैं। इतनी समस्या के बावजूद भी केवल राजनीतिक चल रही है। बारिश के दिनों में सडक की स्थिति का जायजा लेने सांसद स्वयं कलेक्टर के साथ स्कूटी चलाकर भ्रमण किया था। इस दौरान लोगों को उम्मीदें जगी थी कि सडक की समस्या दूर होगी। इसी बीच पूर्व उप मुख्यमंत्री ने भी सडक की जायजा लेकर एमजी रोड में स्टोन डस्ट डलवाकर गड्ढों को भरवाया था। लेकिन बारिश के बाद डस्ट अब धूल बनकर उड़ रही है। वहीं विभाग का कहना है कि सडक मरम्मत के लिए केन्द्र सरकार द्वारा पर्याप्त राशि नहीं मिली है। प्रस्ताव भेजा गया है पर उधर से अब तक हरी झंडी नहीं मिली है। जो राशि मिले हैं उससे मरम्मत का काम पूर्ण हो पाना मुश्किल है। वहीं अंबिकापुर-बलरामपुर मार्ग स्थित एनएच 343 की भी स्थित काफी खस्ताहल है। इस मार्ग पर उड़ रही धूल के गुब्बार से वाहन चालक परेशान हो रहे हैं। लोग वैकल्पिक मार्ग से सफर करने को मजबूर हैं। अंबिकापुर-मनेन्द्रगढ़ रोड पर चलने वाले राहगिरों ने सडक की स्थित को देखकर उनका कहना यह सडक जानलेवा है। इसपर चलना खतरों से खाली नहीं है। इस मार्ग पर चलने वाले बाइक सवारों को कई तरह के दर्द सहना पड़ रहा है। घर पहुुुंचते ही इनकी कमर अकड़ जा रही है। वहीं उड़ रही धूल से भी लोग परेशान हैं। इस मार्ग पर हमेशा हादसों का भय बना हुआ है। जरा सा भी सावधानी हटी दुर्घटना घटी जैसी स्थिति बनी हुई है।
एमजी रोड के लिए 1.70 करोड़ की जरूरत
एमजी व खरसिया रोड काफी जर्जर है। इन दोनों सडकों की मरम्मत के लिए विभाग द्वारा शासन को 1.70 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। लेकिन अब तक जवाब नहीं आया है। विभाग के ईई नीतेश तिवारी बताया कि राशि की प्रस्ताव को लेकर विभाग के अधिकारी दिल्ली जाने वाले हैं। इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। अंबिकापुर से सिलफिली तक 20 किमी एनएच की सडक काफी जर्ज है। इसके अलावा एक किमी खरसिया रोड की सडक खराब है। इन दोनों मार्ग पर चलना मुश्किल हो गया है। विशेषकर अंबिकापुर-मनेन्द्रगढ़ मार्ग गड्ढों में तब्दील हो गया है।
बलरामपुर मार्ग के लिए 28 करोड़ की जरूरत
एनएच-343 अंबिकापुर-रामा नुजगंज मार्ग 77 किमी जर्जर है। इस सडक की मरम्मत के लिए विभाग द्वारा केन्द्र सरकार को 28 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। अंबिकापुर से बलरामपुर तक के लिए 19 करोड़ व बलरामपुर से आगे के लिए 9 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है।
शहर का है प्रमुुख मार्ग
एमजी रोड की ओर से शहर में प्रवेश करने के लिए अधिकांश वाहनों की आवाजाही इसी मार्ग से होती है। इसके साथ ही जिले के अधिकांश गांव के किसान भी अपनी उपज मंडी इसी मार्ग से आते हैं। कई कार्यालय, शहर का मुख्य मार्केट भी इसी मार्ग पर हैं। ऐसे में यह मार्ग अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रतिदिन लगभग हजारों वाहनों की आवाजाही होती है। सड़क का निर्माण शुरू हुआ तो लगा कि अब गड्ढों व हिचकोलों से राहत मिलेगी, लेकिन डामर न होने से धूल के गुबार उड़ने से दिखाई तक नहीं दे रहा है।
प्रतिदिन निकलते हैं हजारों वाहन
यहां से प्रतिदिन हजारों की संख्या में वाहन निकलते हैं। सबसे ज्यादा सरकारी नौकरशाहों और स्कूली विद्यार्थियों को होती है, जो रोजाना दोपहिया वाहनों से आवागमन करते हैं। ऐसे में उन्हें हर संभव हादसा होने का अंदेशा बना रहता है। सबसे ज्यादा समस्या उन्हें जब आती, जब कोई बड़ा वाहन निकलता है और धूल के गुब्बार उड़ने से सामने से आने वाला दूसरा वाहन दिखाई नहीं देता।
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