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वसुंधरा उद्यान के टूटे झूले, जर्जर फुटपाथ और स्लेब का रंगरोगन कर जीर्णोद्धार की खानापूर्ति

by admin on | Nov 25, 2024 04:50 PM

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वसुंधरा उद्यान के टूटे झूले, जर्जर फुटपाथ और स्लेब का रंगरोगन कर जीर्णोद्धार की खानापूर्ति

वसुंधरा उद्यान के टूटे झूले, जर्जर फुटपाथ और स्लेब का रंगरोगन कर जीर्णोद्धार की खानापूर्ति

कलेक्टर की विशेष निगरानी के बावजूद गुणवत्ता ताक पर 


जांजगीर-चांपा :- कलेक्टर की सीधी निगरानी वसुंधरा उद्यान का जीर्णोद्धार कार्य पर है। इसके बावजूद निर्माण कार्य में गुणवत्ता ताक पर है। जाहिर है कि वसुंधरा उद्यान को चकाचक करने जोर-शोर से कार्य चल रहा है, लेकिन कार्य की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद उद्यान का हाल वैसा ही है जैसा पहले था। टूटे झूले, जर्जर फुटपाथ और स्लेब को सिर्फ रंग-रोगन कर चमकाने का दिखावा किया जा रहा है। वहीं जिम्मेदार लोगों का कहना है कि कार्य अंतिम चरण में है। ऐसे में उद्यान के जीर्णोद्धार का असली मकसद जनता की भलाई कम, और फोटो सेशन सफल बनाना ज्यादा नजर आ रहा है। फुटपाथ और झूले जिनकी मरम्मत होनी चाहिए थी, उन्हें बस पेंट कर नया दिखाने की कोशिश की गई। पौधे सूख गए हैं, जिन्हें छिपाने का प्रयास हो रहा है। सीएसआर और डीएमएफ की राशि से हो रहे इस काम में लाखों रूपए फूंक दिए गए हैं पर नतीजा सिर्फ दिखावे का विकास है। सवाल यह उठता है कि अगर कलेक्टर की मौजूदगी में यह हाल है, तो उन योजनाओं का क्या होगा जो उनकी निगरानी से दूर हैं? ऐसे में यह भी बड़ा सवाल है कि ये सब किसके शह पर हो रहा है, जो उद्यान का कायाकल्प करने के नाम पर भी अपनी जेब भरने से बाज नहीं आ रहे हैं।

2006 में हुआ शिलान्यास, 18 सालों से बदहाली जारी

वसुंधरा उद्यान का शिलान्यास 2006 में हुआ था और इसे 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह ने जनता को समर्पित किया। तब से अब तक उद्यान में नाम मात्र के कार्य हुए हैं। 94 लाख की लागत से बने इस उद्यान का न तो रखरखाव हो रहा है और न ही सही तरीके से मरम्मत।

गुणवत्ता नहीं, प्रचार है प्राथमिकता

यह पहला मौका नहीं है जब प्रशासन ने दिखावे के नाम पर लाखों खर्च कर दिए हों। हर बार जनता को चमक-दमक का सपना दिखाकर असलियत छुपा ली जाती है। लेकिन इस बार कलेक्टर की सीधी निगरानी में हो रहे इस कार्य ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


जनता का सवाल कब सुधरेगी प्रशासन की कार्यशैली?

वसुंधरा उद्यान के जीर्णोद्धार की पोल अब खुल चुकी है। जनता पूछ रही है कि कलेक्टर की निगरानी में भी अगर काम में गुणवत्ता नहीं है, तो अन्य योजनाओं का क्या हाल होगा? क्या प्रशासन सिर्फ प्रचार और फोटोशूट तक सीमित रहेगा, या वाकई विकास कार्य जमीन पर नजर आएंगे?


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