by admin on | Nov 29, 2024 09:32 AM
रायगढ़ -: धुएं पर रोकथाम लगाकर पर्यावरण को सही रखने के लिए कोर्ट और सरकार भरसक प्रयास करने पर लगे हुए हैं लेकिन प्रदूषण विभाग की लापरवाही से सफलता नहीं मिल पा रही। शहर के आसपास बेतरतीब तरीके से धुआं उगलती चिमनियां इसका जीता जागता उदाहरण हैं। एक तरफ जिला औद्योगिक और पावर हब बन चुका है विकास के मायने में इबारत मिल का पत्थर साबित हो रहा है किंतु इस विकास ने मानव जीवन को उतना ही जटिल बनाते जा रहा है। विकास के नाम पर हरियाली नष्ट हो रही है चारो तरफ धूल गुबार काला डस्ट जीवन का रुख ही बदल कर रख दिया है। हम नित नई बीमारियों से घिर रहे हैं। पर्यावरण मित्र बजरंग अग्रवाल ने उक्त आरोप लगाते हुए कहा है कि इस ओर जिला प्रशासन द्वारा कब कठोर कार्रवाई होगी। पर्यावरण मित्र के बजरंग अग्रवाल ने आरोप लगाते हुए कहा कि काले डस्ट और प्रदूषण की वजह से कई तरह की बीमारियो समेत कैंसर जैसी घातक बीमारियां अब तेजी पांव पसार रहा है। फ्लाई ऐश की जटिल समस्या मुंह बाए खड़ी है। एनजीटी इस पर अपनी तरफ से लगाम कसने कार्रवाई तो करता है लेकिन उद्योगपति धनबल रसूख के बल पर एनजीटी द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी उद्योग स्थापना और विस्तार के लिए जन सुनवाइयां कराए जा रही है और शासन प्रशासन जनहित को दरकिनार कर आंखें मूंदे हुए हैं। बजरंग अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि क्या जब जहरीली हवा पूरी तरह से जानलेवा हो जायेगा तब कुंभकरणीय निद्रा से जागेंगे लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।
ईएसपी मशीन बंद कर निकालते हैं काला धुआं
अधिकांश उद्योग रात ढलते ही ईएसपी मशीन बंद कर काला धूंवा खुले में छोड़ते है और यह किसी से छुपी नहीं है। उद्योग क्षेत्र के ग्रामीण इसे लेकर अक्सर मोर्चा खोलते हैं शिकायत की जाती है लेकिन पर्यावरण विभाग नोटिस नोटिस का खेल कर मामले को इतिश्री कर देते हैं। बहुत ज्यादा हुआ तो जुर्माना लगाकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।
फ्लाई ऐश निपटारा को लेकर नहीं कोई गंभीर
दूसरी ओर जिले में कोयला आधारित पावर उद्योग से निकलने वाली फ्लाई ऐश को लेकर न तो जिला प्रशासन गंभीर है और न ही क्षेत्रीय पर्यावरण विभाग इसकी निगरानी करता है। जिसकी वजह से उद्योग प्रबंधन जहां तहां फ्लाई ऐश डाल रहे हैं। जिसकी वजह से आबोहवा में काला डस्ट और जहरीला हो चला है। इसकी वजह से मानव जीवन के साथ जल जंगल और जमीन पर भी इसके भयावह दुष्परिणाम देखने को मिल रहा है। घर आंगन में काली डस्ट की परत से समूचे शहरवासी वासी वाकिफ है। नदी नाले और पेड़ पौधों पर भी काले डस्ट ने अपना घर जमा जमा लिया है।
फसल व पेड़ पौधों पर जम रही काली परत
प्रदूषण किस कदर हावी हो चुका है। इसकी बानगी हर तरफ देखने को मिल जाता है। पेड़ पौधों फसल पर काली डस्ट की परत आसानी से देखने को मिलती है। काली परत न सिर्फ पेड़ पौधों फसल पर ही नहीं पड़ रही बल्कि इसका असर हमारे आपके घरों तक पहुंच चुकी है। काली डस्ट की परत हमारे जीवन इस तरह पहुंच चुकी है मानों यह हमारे जीवन का एक हिस्सा हो। प्रदूषण की भयंकर मार चारो तरफ फैल चुकी है। इससे निपटने यदि समय रहते कारगर कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले समय में भविष्य बहुत तकलिफ देह होगी।
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